श्वसन से सम्बंधित बहुत important जानकारी:-

साँस की बीमारी से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य जो आपको पता होंना चाहिए-indianeducationtips
क्या आप जानते है की सामान्य इन्सान हर दिन लगभग 35000 तक सांसे लेता है यानि की आपके फेफड़े जीवन में बिना रुके निरंतर काम करते है|यदि यह रुक जाये तो या ये खराब हो जाये तो आप साँस नही ले सकते.जेसा की आप लोग जानते ही होंगे की विषाक्त स्मोग,ग्लोबल वार्मिंग, वाहन प्रदूषण और कारखानों का धुआ इन दिनों वायु प्रदूषण को बडा रहे है जो साँस प्रणाली के प्रभावित कर रहे है या नुकशान दे रहे है.वेसे देखा गया है लोग अधिकतर स्वांस सम्बन्धी समस्याओ को अनदेखा कर देते है जबतक की वे एक बड़ी बीमारी का शिकार ना हो जाते है.इस बीमारी का इलाज सही टाइम पर होना चाहिए अन्यथा बहुत बड़ी समस्या हो सकती है.आइये सबसे पहले जानते है की श्वसन रोग है क्या ?
सबसे पहले आपको ये बता दे की श्वसन तंत्र में बहुत प्रकार की बिमारिया होती है अर्थात श्वसन रोग में विभिन्न प्रकार की रोगजनक समस्या शामिल होती है जो आपके श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है.श्वसन के इस तंत्र में एल्वियोली,ब्रोंची,ट्रेकिया,ब्रोंकिओल्स,प्लुरा और स्वांस की तंत्रिकाए और मांसपेशियों होत्ते है.स्वांस रोग आपके उपरी और निचले श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकता है.यह आमतोर पर आपके साइनस से शुरू होता है और आपके मुखर डोरिया (वोकल कोड्स) और फेफड़ो को प्रभावित करता है.कुल मिलाकर अगर बात की जाये तो श्वसन हमारे शरीर की आधी से ज्यादा बीमारियों से जुडी हुयी है.और श्वसन मानव शरीर के पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
श्वसन रोग के प्रकार या माध्यम
श्वसन सम्बन्धी बिमारिया बहुत ही हानिकारक होती है तथा ये हमरे शरीर को उपर से नीचे तक बहुत मात्रा में भरी नुकसान पहुचाती है तथा इससे ये कभी कभी इतनी घातक होती है की मनुष्य को मरने पर मजबूर कर देती है क्या आपको पता भी है की श्वसन से सम्बंधित बीमारिया किससे होती है या कोंनसे इसके प्रकार है जिससे ये घातक बीमारिया होती है.
प्रकार
1.फेफड़े के रोग (उतक );-ये रोग फेफड़े के तिश्युम (उतक) की संरचना को प्रभावित करते है.जिससे फेफड़े में सुजन आ जाती है तो वायु हमारे फेफड़े तक नहीं पहुंच पाती है और साँस लेने में कठिनाई आती है.फेफड़े के टिश्यु से होने वाले रोग है -पल्मोनरी फाइब्रोसिस और सारकोईडोसिस है.
2.वायु सम्बन्धी रोग:-ये रोग आपके फेफडो के ऑक्सीजन में तथा और अन्य गेसो को ले जाने वाली नलियों को प्रभावित करता है .ये आपके साँस प्रणाली वाले मार्ग में संकीर्ण तथा अवरोध कर देता है .इससे फेफड़ो में केंसर, अस्थमा ,तपेदिक और अन्य प्रकार की बिमारिया होती है.इसमें आपके फेफड़े में कई बार तो धुआ या प्रदुषण के माध्यम से हो जाती है.
क्या है साँस सम्बन्धी रोगों के कारण :-
- जहरीले धुए और अन्य जहरीली सामग्रियों का अत्यधिक संपर्क
- धुम्रपान और तम्बाकू
- इनडोर और बाहरी वायु प्रदुषण
- वैश्विक तापमान
- शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का कम होना
- बेक्टीरिया,फंगल, और वायरल संक्रमण
इनमे सबसे ज्यादा प्रभावित धुम्रपान और अन्य प्रकार के नशे करने से होता है जो की पुरे विश्व भर में सबसे ज्यादा प्रभावित होते है.इनमे से 70% तक लोग धुम्रपान के माध्यम से साँस सम्बन्धी बीमारियों का शिकार हो जाते है.
साँस की बीमारियों के लक्षण:-
जब आपको भी लगने लग जाये की ये लक्षण आपके साथ घटित हो जाये तो देख सकते हो किआपको साँस सम्बन्धी बीमारी हो गयी है आइये जानते है कुछ महत्वपूर्ण लक्षण
- थकान
- लगातार खासी होना
- शरीर में बहुत दर्द होना
- खराश और सुजन के कारण दर्द होना
- छाती के क्षेत्र में घिसाव होना
- कभी कभी खासी के साथ खून आना
- घबराहट होना और शरीर कांपना
- और साँस में तकलीफ के कारण पैर की अंगुलियों में सुजन होना
- साँस के कारण मनुष्य की आवाज में बदल
साँस सम्बन्धी बीमारियों का इलाज:-
सबसे पहले अगर आप को साँस सम्बन्धी बीमारी हो तो पहला ध्यान ये रखे की आप घबराये नही तथा डॉक्टर की परामर्स ले तथा डॉक्टर को आपकी समस्या के बारे में खुल के बता तथा आराम से लम्बी सांसे ले और छोड़े.और बहुत से क्रत्रिम उपचार भी है जो आप कही पर भी कर सकते है बिना किसी डॉक्टर की सहयता से:-
- आपके आस-पास कही पर भी स्वच्छता बनाये रखे तथा गंदगी को आपने दूर रखे क्योकि गंदगी से आप सभी लोगो को पता होगा की सभी बिमारिया दूर रहती है.
- अधिक से अधिक हरियाली वाले जगहों पर सैर करे तथा खुली जगह पर रहे .
- कभी भी खांसते या छींकते वक्त अपना मुह ढक कर रखे.
- Humidifide ऑक्सीजन का प्रयोग करे.
- जहरीले धुएं तथा धुम्रपान वाली जगहों से हमेशा दूर रहे.
- वेंटिलेटर का प्रयोग.
- अनुलोम तथा विलोम करे सदेव 10-15 मिनट तक
- सर्जरी, कीमोथेरेपी,रेदीयेसन थेरेपी, और टार्गेटेड थेरेपी.
साँस की बीमारियों के उपाय(Important):-
- धूम्रपान का सेवन करना छोड़ दे.
- अपने फेफड़े पर हमेशा वजन कम रखें अर्थात अपने ह्रदय पर काम भार हो इसलिए कम-से-कम 30 मिनट तक आसन करे.
- हमेशा भोजन करने के बाद हाथ अच्छी तरीके से धोएं.
- हमेशा खांसते ओर छींकते समय अपने मुह पर रुमाल या कपड़ा अवस्य रखे.
- एयर प्यूरीफायर का प्रयोग करे.
- हो सके तो दिन में एक बार सीढ़िया अवश्य चढ़े.
- जब भी आप अपने घर से बाहर हो तो स्वच्छता बनाये रखे तथा साफ कपड़े अपने मुह पर रखे.

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